श्रीमद्भगवतगीता भौतिक युग में मानव जिदंगी का दर्पण
हरिद्वार। धरती पर जीवमात्र अपने कर्मों के आधार पर सुख-दुख का उपभोग करता है। सुख सद्कर्मांे का प्रतीक है। वहीं दुख बुरे कर्मांे का। सुख का उपभोग करने पर आनन्द एवं शान्ति की अनुभूति होती है। वहंी दुख के उपभोग में कष्ट एवं पीडा का अनुभव होता है।वर्तमान परिवेश में श्री मद्भगवत गीता की सार्थकता […]
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