गंगा भारत का प्राण व संस्कृति का प्रतीकः विश्वेश्वरानंद

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कोरोना मुक्ति की कामना को लेकर किया मां गंगा का अभिषेक
हरिद्वार।
गंगा दशहरा पर्व पर श्री सूरत गिरि बंगला गिरिशानंदाश्रम में मां गंगा का पूजन व अभिषेक कर कोरोना से मुक्ति की कामना की गई। आश्रम के परमाध्यक्ष महामण्डलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि महाराज की प्रेरणा से आचार्य विनीत के नेतृत्व में 21 वेदपाठी ब्राह्मणों ने मां गंगा का अभिषेक, पूजन, रूद्राभिषेक के साथ स्वरात्मक गंगा लहरी का पाठ किया। सभी ने वैश्विक महामारी से मानव जाति को निजात दिलाने के लिए मां गंगा से प्रार्थना की।
आश्रम के गंगा तट पर प्रातः वेदपाठी ब्राह्मणों ने गणेश पूजन के पश्चात मां गंगा का पूजन व अभिषेक किया। इसके पश्चात स्वरात्मक गंगा लहरी का पाठ व रूद्राभिषेक किया गया। अपने संदेश में स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि महाराज ने कहाकि मां गंगा एक नदी मात्र नहीं है। गंगा भारत का प्राण व संस्कृति का प्रतीक है। यही कारण है कि हम गंगा का मां कहकर पुकारते हैं। उन्होंने सभी से गंगा की स्वच्छता व निर्मलता बनाए रखने की अपील करते हुए कहाकि हम सब मिलकर वैश्विक महामारी कोरोना से निजात के लिए मां गंगा से प्रार्थना करें। उन्होंने सभी से कोरोना से बचाव के लिए सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ के विभाग प्रचारक शरद ने कहाकि गंगा भारतरूपी शरीर की काशिकाओं में बहने वाले रक्त के समान है। जो भारत को नया संबल प्रदान करती है। उन्होंने कोरोना से शीघ्र निजात की मां गंगा से कामना की। इस अवसर पर स्वामी विश्वस्वरूपानंद गिरि, स्वामी कमलानंद गिरि, स्वामी गवीन्द्रानंद, संघ के अमित त्यागी आदि वेदपाठी ब्राह्मण व आश्रमस्थ संत-महात्मा मौजूद रहे।

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