हरिद्वार। अखिल अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद तथा समस्त संत समाज कुंभ पर्व को दिव्य और भव्य बनाने के लिए सरकार और कुंभ मेला प्रशासन के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ लोग अखाड़ा परिषद और सरकार के बीच मतभेद की भ्रांतियां फैला रहे हैं, जो कि पूरी तरह निराधार और अनुचित है।
महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि कुंभ मेला सनातन सभ्यता का प्राचीन और अत्यंत पवित्र पर्व है। इसकी परंपरा समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश से जहां-जहां अमृत की बूंदें गिरीं, वहीं चार स्थानों, नासिक, उज्जैन, प्रयागराज और हरिद्वारकृपर कुंभ का आयोजन होता है।
उन्होंने बताया कि कुंभ पर्व का आयोजन ज्योतिषीय गणना और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर तय होता है। विशेष रूप से बृहस्पति की स्थिति और अन्य ग्रहों की गणना के अनुसार कुंभ का समय निर्धारित किया जाता है। सामान्यतः यह पर्व लगभग 12 वर्षों के अंतराल पर आयोजित होता है।
महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि अखाड़ा परिषद के सभी 13 अखाड़े और चारों प्रमुख संप्रदाय सरकार व मेला प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर कार्य करेंगे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो और कुंभ का आयोजन भव्य व व्यवस्थित रूप से संपन्न हो सके। सभी अखाड़े गाजे बाजे के साथ कुंभ का आयोजन करेंगे।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग अनावश्यक बयानबाजी कर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन संत समाज अपनी परंपराओं के अनुसार व्यवस्थाएं करते हुए सरकार को हर संभव सहयोग देगा।
अंत में उन्होंने देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे कुंभ पर्व में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें और इस पावन आयोजन को सफल बनाएं।
