देश की पुलिस व्यवस्था एक गुलामी की व्यवस्था जैसी: सच्चिदानंद राम

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रुड़की/संवाददाता
सेवानिवृत्त दरोगा सचिदानंद राम ने आरोप लगाया कि देश की पुलिस व्यवस्था एक गुलामी की व्यवस्था है, जो देश को अंग्रेजों ने दी है। अब समय आ गया है पुलिस के सदियों पुरानी चली आ रही गुलामी की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन हो। उन्होंने कहा कि इस चली आ रही व्यवस्था के विरोध में वह एक आंदोलन चलाएंगे और साथ ही साथ आम आदमी पार्टी भी ज्वाइन करेंगे।
उल्लेखनीय है कि दरोगा सचिदानंद गत वर्ष उत्तराखंड पुलिस से सेवा निवृत हुए है। लेकिन उनका आरोप है पूरे पुलिस कैरियर में उनके विभाग ने उनका जमकर शोषण किया। उनका कहना है कि अब वह अपने प्रति हुए अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे। उनका कहना है कि चूँकि वह लॉ परीक्षा उत्तीर्ण है, तो रुड़की में बतौर वकील प्रैक्टिस भी करेंगे। दरोगा सचिदानंद वर्ष 1980 में बतौर सिपाही उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती हुए और फिर 1986 में हैड कांस्टेबल पद पर पदोन्नत हुए। आगे चलकर वर्ष 1995 में सबइंस्पेक्टर पर उन्हें पदोन्नति मिली लेकिन उन्हें विभाग ने यह पदोन्नति प्रदान नहीं की क्योंकि कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इन्हें तेजी से पद्दोनत होते देखना नही चाहते थे। दरोगा सचिदानंद बताते है कि इसके विरोध में वह न्यायालय भी गए, जहां उनके पक्ष में फैसला आया लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस फैसले को लागू नहीं किया। वर्ष 2004 में विकल्प के चलते इन्होंने उत्तराखंड पुलिस बतौर सब इंस्पेक्टर जाइन की मगर इन्हें वेतन सिर्फ हैड कांस्टेबल (एक स्टार) का ही मिला, जो इनकी सेवा निवर्ती 2020 तक लागू रहा। दरोगा सचिदानंद ने आरोप लगाया है कि यदि किसी पुलिस कर्मी की अपने सीनियर विशेषतः आईपीएस ऑफ़िसर से बात बिगड़ जाती है तो उस पुलिस कर्मी का पूरा कैरियर सुनियोजित तरीके से चौपट कर दिया जाता हैं। उन्होंने कहा कि वह इस तरह के उत्पीड़न की जिंदा मिसाल है। उन्होंने बताया कि बतौर कमांडो वह असम में अपनी उल्लेखनीय सेवाएं दे चुके और बतौर सब-इंस्पेक्टर उन्होंने मात्रा दस महीने की अवधि में 120 मामलों की जांच कर उन्हें निस्तारित किया जो स्वयं में एक रिकॉर्ड है। सचिदानंद ने कहा कि अंग्रेजों के द्वारा बनाई गई इस पुलिस को बदलने का समय आ गया है और ऐसी पुलिस अपने देश मे होनी चाहिये जो अंग्रेजो ने खुद अपने लिए बनाई है। उन्होंने कहा इंग्लैंड की तर्ज पर ‘बॉबी पुलिस’ देश मे होनी चाहिए, जहां एक सिपाही अपने परिश्रम और विभागीय पारदर्शिता के चलते एक दिन खुद पुलिस चीफ हो जाता है।

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