अच्छी समझ को दीमक की तरह खा जाता है अवसाद
हरिद्वार। चिंता का विकृत रूप ही अवसाद है। अवसाद व्यक्ति के सोचने-समझने की शक्ति पर ऐसा प्रहार करता है कि व्यक्ति समाधान से जुडे सभी रास्ते एक के बाद एक स्वतः ही बंद कर लेता है। अन्त में अज्ञानता की अंधेरी कोठरी मंे जा बैठता है जहां व्यक्ति के पास अच्छी समझ पहुंचने के प्रयास […]
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