अखाड़ों की दादागिरी से त्रस्त होकर जन्मी मण्डलेश्वर समिति
हरिद्वार। पूर्व में सभी अखाड़ों को आचार्य मण्डलेश्वर एक ही हुआ करता था। किन्तु की व्यवहारिक दिक्कतों के कारण सभी अखाड़ों में आचार्य बनाने की परम्परा का सूत्रपात हुआ। मण्डलेश्वर मण्डलीश्वर का अपभ्रंश है। पूर्व में मण्डलीश्वर विद्वान संत हुआ करते थे। जो संतों के समूह को नेतृत्व करते हुए स्थान-स्थान घूमकर धर्म प्रचार और […]
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