संतों की राजनीति या राजनीति के संत
दिगम्बर होते हुए भी धन के पीछे दौड़ रहे भगवाधारी हरिद्वार। शास्त्रों में वर्णित है कि जहां समानता है वहीं संतई है। संत समाज में रहकर भी समाज से दूर रहता है। संत का कार्य जप, ध्यान और समाज का मार्गदर्शन करना होता है। किन्तु वर्तमान में संतों ने जप, ध्यान व मार्गदर्शन को तिलांजलि […]
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