राजाजी टाइगर रिजर्व में मंत्री पुत्र की शादी पर बवाल, केस दर्ज

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हरिद्वार। उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व में प्रस्तावित एक वीआईपी शादी समारोह को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरक्षित वन क्षेत्र के भीतर स्थित सुरेश्वरी देवी मंदिर परिसर में उत्तराखंड सरकार के एक कैबिनेट मंत्री के बेटे की शादी की तैयारियां बिना अनुमति किए जाने का मामला सामने आया है। वन विभाग ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए मंदिर समिति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और सभी अस्थायी व्यवस्थाएं हटवा दी हैं।
जानकारी के अनुसार, रविवार रात आयोजित होने वाले शादी समारोह के लिए एक दिन पहले ही बड़े पैमाने पर तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। ट्रकों के जरिए टेंट, कुर्सियां, सजावटी सामग्री और अन्य सामान जंगल के भीतर पहुंचाया गया। मंदिर परिसर में पंडाल लगाया गया और पूरे क्षेत्र को सजाया गया।
हालांकि, राजाजी टाइगर रिजर्व के नियमों के अनुसार आरक्षित क्षेत्र में इस प्रकार के बड़े आयोजनों की अनुमति नहीं दी जाती। इसके बावजूद तैयारियां दिनभर चलती रहीं और पार्क प्रशासन की ओर से शुरुआती स्तर पर कोई रोक-टोक नहीं की गई।
मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब शादी की तैयारियों के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि संवेदनशील वन क्षेत्र में इतने बड़े आयोजन की अनुमति किसने दी, या फिर यह सब बिना अनुमति के ही हो रहा था।

विशेषज्ञों के अनुसार, सुरेश्वरी देवी मंदिर क्षेत्र घने जंगलों के बीच स्थित है, जहां हाथी, गुलदार (तेंदुआ) समेत कई वन्यजीवों की सक्रिय आवाजाही रहती है। ऐसे में बड़े आयोजन, शोर-शराबा और भीड़ से वन्यजीवों और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विवाद बढ़ने के बाद वन विभाग हरकत में आया और तत्काल प्रभाव से पार्क का गेट बंद कर दिया गया। मंदिर परिसर में लगाए गए पंडाल और अन्य संरचनाएं हटवा दी गईं। आयोजन से जुड़ी सभी तैयारियों को रोक दिया गया। वन विभाग ने स्पष्ट किया कि अब केवल सीमित रूप से पूजा-अर्चना और पारंपरिक शादी की रस्में ही संपन्न कराई जाएंगी।

राजाजी टाइगर रिजर्व के वार्डन अजय लिंगवाल ने कहा कि रिजर्व क्षेत्र में शादी जैसे बड़े आयोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने बताया कि बिना अनुमति तैयारियां किए जाने पर मंदिर समिति के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।

इस पूरे प्रकरण में अब कई अहम सवाल खड़े हो गए हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में सामान जंगल के भीतर कैसे पहुंचा? पार्क के प्रवेश द्वार पर निगरानी व्यवस्था क्यों विफल रही? क्या स्थानीय स्तर पर किसी ने जानबूझकर अनदेखी की?। वन विभाग ने कहा है कि इन सभी बिंदुओं की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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